અરડૂસી अडूसा (वासा-Adhatoda vasika) 

 अडूसा

जबतक है वासा क्या करेगा कासा (T.B.)

मतलब जबतक इस पृथ्वी पर वासा औषधि मौजूद  रहेगी तबतक किसिभी क्षय टी. बी.  वालेको गबरानेकी जरूरत  नहीं है 

                                                                    अडूसा जिसे वासा भी कहा जाता है एक आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है। इस पौधे का प्रयोग खांसी, अस्थमा, साँस की तकलीफ, नाक बंद होना, रक्तस्राव संबंधी विकार, एलर्जी, श्वसन प्रणाली के संक्रमण, गर्भाशय से अत्यधिक रक्तस्राव, माहवारी  में अत्यधिक खून बहना, और नाक से खून बहना आदि समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है।

अडूसा अर्थात् वासा कफ का स्त्राव कम करता है और खांसी को ठीक करता है। इसमें कफ निस्सारक (बलगम निकालने वाली) और ब्रांकोडायलेटर गुण पाए जाते है। इन गुणों के कारण इसका प्रयोग सांस की तकलीफ में किया जाता है। यह खांसी से मुक्ति दिलाता है, श्वसन संस्थान के संक्रमण से छुटकारा दिलाता है और अस्थमा को दूर करने में भी सहायक है।

वासिसिन नामक अल्कोलॉइड अडूसा में पाया जाता है जो कफ निस्सारक और ब्रांकोडायलेटर का काम करता है। इससे प्रेरणा BROMHEXINE दवा बनाई गई है।  जिसका प्रयोग एलोपैथिक डॉक्टर श्वसन संस्थान के रोगों में करते है। इसका प्रयोग एलोपैथिक डॉक्टर श्वसन संस्थान के रोगों में करते है।

आयुर्वेदिक गुण धर्म एवं दोष कर्म

रस (Taste)तिक्त, कषाय

गुण (Property)लघु, रुक्ष

वीर्य (Potency)शीत (ठंडा)

विपाक (Metabolic Property)कटु

दोष कर्म (Dosha Action)कफ शामक, पित्त शामक

औषधीय कर्म (Medicinal Actions)

अडूसा (वासा) में निम्नलिखित औषधीय गुण है:

  • कफ नि:सारक – बलगम की चिपचिपाहट कम कर और कफ स्राव को तोड़कर कफ को बाहर निकालने वाला

  • श्लेष्मपूतिहर

  • कासहर

  • श्वासहर

  • ह्रदय – दिल को ताकत देने वाला

  • रक्त शोधक

  • रक्तस्तभ्भन (शोणितस्थापन)

​औषधीय प्रयोग 

अडूसा (वासा) निम्नलिखित रोगों में सहायक है।

  • खांसी (पीले गाढ़े थूक और बुखार के साथ)

  • ट्यूबरकुलोसिस के कारण पुरानी खाँसी बिना क्षय रोग की दवाइयों के साथ

  • अस्थमा (घरघराहट, श्वास में समस्या और छाती में जमाव)

  • ऊपरी श्वसन संक्रमण (बुखार और अधिक खाँसी के साथ)

  • सामान्य सर्दी जुकाम (मोटे पीले रंग के डिस्चार्ज या जीवाणु संक्रमण के साथ)

  • पुरानी श्वसनीशोध

  • साइनसाइटिस (शिरानालशोथ)

  • गले में खराश

  • गले में दर्द

  • गले में जलन

  • टॉन्सिलिटिस (टॉन्सिल की जलन या सूजन लाल रंग के साथ)

  • गले का अल्सर

  • अधिक प्यास लगना

  • नाक से खून निकलना (एपिस्टेक्सिस) – अतिरिक्त गर्मी के कारण

  • हृद्‍शूल

  • दिल का रोग (उच्च रक्तचाप के साथ)

  • हल्की कब्ज

  • डेंगू बुखार

अडूसा (वासा) के  लाभ और उपयोग

आयुर्वेद में अडूसा श्वसन रोगों के लिए सबसे पसंदीदा दवा है। खांसी और अस्थमा के लिए प्रयोग होने वाली हर आयुर्वेदिक दवा में इसका प्रयोग किया जाता है। यह एक साधारण, आसानी से मिलने वाली और सुरक्षित जड़ी बूटी है जो बैक्टीरिया के संक्रमण और गले की समस्याओं से राहत प्रदान करती है। इस जड़ी बूटी का खास प्रभाव श्वसन प्रणाली और संचार प्रणाली पर पाया गया है। अडूसा के कुछ नैदानिक उपयोग और स्वास्थ्य लाभ इस प्रकार हैं।

खांसी

अडूसा में खांसी को रोकने के लिए खास गुण हैं जिससे खांसी में राहत मिलती है। पशुओं पर किये गए अध्ययनों में ऐसा पाया गया है कि खांसी को दबाने का प्रभाव कौडीन (पोस्ताखार) के बराबर है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में अडूसा का प्रयोग तब किया जाता है जब रोगी को गाढ़े पीले थूक वाली खांसी हो और बुखार, घरघराहट या खांसने में भी समस्या हो। ऐसे में निम्नलिखित जड़ी- बूटियों का संयोजन दिया जाता है।

यह भी देखें  दिव्य तुलसी घनवटी

अडूसा चूर्ण2 ग्राम

सितोपलादि चूर्ण – Sitopaladi churna2 ग्राम

शहद1 चम्मच

अडूसा के पत्तों से बनाया जाने वाला काढ़ा भी ऐसी समस्या को दूर करता है। इसका काढ़ा सूजन, खाँसी  और घरघराहट को कम करता है और यह आसानी से साँस लेने में मददगार है।

अस्थमा

अडूसा में सूजन को कम करने गुण होते हैं। यह अस्थमा के रोग में सहायक है साथ ही यह वायुमार्ग और फेफड़ों की सूजन को भी कम करता है।

इसके अलावा अडूसा में पाया जाने वाला वासिनी कंपाउंड श्वसनीविस्फारक होता है जो साँस लेने की की प्रक्रिया को आसान बनाता है और अस्थमा के कारण होने वाली घरघराहट कम करता है।

आयुर्वेद में, निम्नलिखित जड़ी बूटियों का मिश्रण अस्थमा के लिए सहायक होता है।

ताज़ा अडूसा के पत्तों का रस 5 मिलीलीटर

ताजा अदरक का रस2.5 मिलीलीटर

शहदएक चम्मच

अगर आप ताज़ा दवा को तैयार नहीं कर सकते तो जड़ी बूटियों के निम्नलिखित फॉर्मूले से भी अस्थमा के अटैक को कम कर सकते हैं और इससे साँस लेने में भी मदद मिल सकती है।

अडूसा का चूर्ण2 ग्राम

पुष्करमूल250 मिलीग्राम

त्रिकटु चूर्ण – Trikatu250 मिलीग्राम

सितोपलादि चूर्ण2 ग्राम

शहद1 चम्मच

ऊपरी श्वसन संक्रमण

अडूसा में जीवाणुरोधी और रोगाणुरोधी गुण मौजूद होते है इसलिए, यह श्वसन प्रणाली में होने वाले विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया संक्रमणों को दूर करने में सहायक है।

आयुर्वेद में अडूसा का प्रयोग समान्यतया बुखार, ऊपरी श्वसन प्रणाली के संक्रमण और खांसी को दूर करने में किया जाता है। इसी उद्देश्य से प्रयोग की जाने वाली कई आयुर्वेदिक योगों का यह प्रमुख घटक है। सबसे समान्य प्रयोग किया जाने वाला सूत्रीकरण वासबलेहा है। अडूसा सूत्रीकरण ऊपरी श्वसन संक्रमण के प्रबंधन में भी उपयोगी है।

अडूसा चूर्ण1 ग्राम

सितोपलादि चूर्ण2 ग्राम

महा सुदर्शन चूर्ण – Mahasudarshan Churna2 ग्राम

तुलसी चूर्ण1 ग्राम

शहद1 चम्मच

जब रोगी को गाढ़ा पीले रंग का थूक आये, खांसी , बुखार, नाक में जमाव या घरघराहट हो तो ऐसे में यह औषधि अच्छे सी काम करती है।

सामान्य सर्दी

अडूसा में वायरल विरोधी औषधीय गुण भी पाए जाते है, जो इसे वायरल रोगों में असरदार बनाते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सक इसका प्रयोग तब करते हैं जब नाक से निकलने वाला मवाद पीला और गाढ़ा हो। सामान्यतया, इस स्थिति में वासावलेह लेने की सलाह दी जाती है, किन्तु इस अवस्था में अडूसा का यह मिश्रम भी असरदार है।

अडूसा1 ग्राम

सितोपलादि चूर्ण1 ग्राम

पुनर्नवा चूर्ण1 ग्राम

त्रिकटु चूर्ण125 मिलीग्राम

शहद1 चम्मच

साइनसिसिस और साइनस संक्रमण

अडूसा में रोगाणुरोधी और जलन विरोधी गुण होते है। यह साइनस में होने वाली सूजन को कम करता है

यह भी देखें  त्रिवंग भस्म

और इन्फेक्शन को रोकने में भी सहायक है। इससे साइनस की रुकावट कम हो जाती है और उनमें जमा मवाद या द्रव भी हटता है।

अडूसा ब्रोन्कियल ट्यूबों पर एंटीसेप्टिक प्रभाव डालता है। यह ब्रोन्कियल ट्यूबों की सूजन को कम करता है और गाढ़े बलगम को कम कर देता है। अडूसा ब्रोन्कियल ट्यूब्स को साफ करता है और खांसी, थूक का उत्पादन, थकान, श्वास और ब्रोंकाइटिस से होने वाले  छाती का दर्द  को कम कर देता है।

श्वासनलियों का फैलाव

श्वासनलियों का फैलाव पुरानी सूजन के कारण होता है, जो थूक को साफ नहीं कर पाने के कारण होता है। ऐसी स्थिति में, वायुमार्ग का असामान्य फैलाव अत्यधिक बलगम के बनने का कारण होता है।

आयुर्वेदिक दवाओं में अडूसा को ऐसी स्थिति से निपटने के लिए प्रयोग किया जाता है। हालाँकि इसमें हल्का ब्रांकोडायलेटर भी होता है किन्तु इसमें म्यूकोलाईटिक और कफ को अच्छे से बाहर निकालने की क्षमता होती है इसलिए इसके ब्रोन्कोडायलेटरी गुणों के प्रभाव आगे पैदा होने वाले ब्रोन्कोडायलेटेशन को कम कर देता है। यह बलगम को बाहर निकालने और खांसने में और वायुमार्ग को साफ़ रखने में मदद करता है। इसके अलावा, इससे वायुमार्ग की पुरानी सूजन कम हो जाती है, जिससे वायुमार्ग के प्राकृतिक कार्यों को करने में मदद मिलती है।

अगर वलगम बहुत गाढ़ी है और इसके बाहर निकलने में मुश्किल हो रही हो तो अडूसा के 20 मिलीलीटर जूस को 250 मिलीग्राम काले नमक (Black Salt) के साथ पीने से लाभ होता है।

ब्रोन्कोडाइलेटेशन को कम करने के लिए 3 ग्राम अडूसा के पत्तों के चूर्ण को 50 मिलीग्राम धतूरा के पत्तों (Datura leaves powder) के चूर्ण और एक चम्मच शहद के साथ लेने से लाभ होता है।

पोस्टासनल ड्रिप या डिस्चार्ज वाले मरीजों को अडूसा के पत्तों को सितोपलादि चूर्ण और पुनर्नवा चूर्ण के साथ देने से भी लाभ मिल सकता है।

अलसर (फोड़ा)

वैज्ञानिक अध्ययन और विश्लेषण के अनुसार, अडूसा में अल्सर रोधी गुण भी पाए जाते हैं। इसके पत्ते  का एस्पिरिन के साथ प्रयोग करने से NSAIDs  के द्वारा होने वाले अल्सरेशन के प्रभाव को कम किया जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार यह यह रक्तस्राव विकारों और अल्सरेशन में फायदेमंद होता है। यह  विभिन्न आयुर्वेदिक प्राचीन किताबों जैसे चरक संहिता में भी बताया गया है।

यह पाचक संबन्धी और डुओडानल अल्सर में भी सहायक है। इस उद्देश्य के लिए अडूसा के निम्नलिखित मिश्रण का उपयोग किया जाता है।

अडूसा1 ग्राम

मुलेठी – (Mulethi) – Glycyrrhiza glabra1 ग्राम

शतावरी चूर्ण – Shatavari500 मिलीग्राम

बंसलोचन – Banslochan500 मिलीग्राम

मिश्री1 ग्राम

रक्तस्राव विकार

(नाक और आंतरिक रक्तस्राव के साथ)

निम्नलिखित मिश्रण का खून बहने के विकार, खांसी, और अस्थमा के लिए प्रयोग किया जाता है।

अडूसा जूस5 ग्राम

विटिस विनिफेरा5 ग्राम

हरीतकी फल का गुदा5 ग्राम

इन जड़ी बूटियों को बताई मात्रा के अनुसार लें और 400 मिलीलीटर पानी में इसका काढ़ा बनाएं। जब यह काढ़ा 100 मिलीलीटर रह जाए तो इसे ठंडा होने दें। अब इस काढ़े में एक चम्मच शहद मिलाएं और दिन में दो बार पीएं।

यह भी देखें  वंग भस्म

गठिया या यूरिक एसिड का बढ़ना

अडूसा सूजन कम करता है। दूसरी जड़ी बूटियों के साथ मिला कर इसका प्रयोग करने से यूरिक एसिड कम होता है। इसके साथ ही गठिये में होने वाली दर्द को भी यह कम करने में मदद करता है। इसका  उपयोग गिलॉय (टिनसॉपोरा कॉर्डिफ़ोलिया) और एमाल्टस (कैसिया फास्ट्यूला) के साथ संधिशोथ में भी किया जाता है।

यूरीमिया

यूरीमिया रक्त में बढ़ रहे यूरिया के स्तर और नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट के कारण होने वाली समस्या है। यह आमतौर पर गुर्दे की चोट और पुरानी गुर्दे की विफलता के कारण होता है। ऐसे मामलों में, गुर्दे इन विषैले अपशिष्टों को खत्म करने में असमर्थ हो जाते हैं।

अडूसा की जड़ का काढ़ा यूरिया के स्तर को कम करने में सहायक है और खून से नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट पर्दार्थों को भी कम करता है। यह काम कैसे करता है इसका अभी कोई पता नहीं है किन्तु यह पेशाब में से यूरिया और बाकि अपशिष्टों को बाहर निकालता है। 50 मिलीलीटर अडूसा की जड़ के काढ़ें को पुराने गुर्दे की विफलता जैसे रोग में पीने से फायदा होता है। इसके लिए इस काढ़े को खाली पेट चन्द्रप्रभा वटी के साथ लेना चाहिए। इस काढ़े के सेवन से कुछ समय बाद ही अच्छे परिणाम मिलते हैं।

गर्भाशय से अधिक रक्त स्राव

अडूसा जूस के 10 मिलीलीटर या 50 मिलीलीटर अडूसा के काढ़ें में दस ग्राम मिश्री मिला कर पीने से  गर्भाशय से होने वाले अधिक रक्त स्राव से छुटकारा मिलता है। इस औषधि को चार से छे हफ्ते तक लेना चाहिए। इस औषधि के साथ चन्द्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati) को लेने से गर्भाशय को अपने प्राकृतिक कार्यों को करने में मदद मिलती है।

सुरक्षा रूपरेखा

ऊपर बताये अनुसार अडूसा के हरेक भाग का सेवन करना सुरक्षित है।

अडूसा के दुष्प्रभाव

अगर अडूसा का प्रयोग इसके प्राकृतिक रूप में किया जाये तो इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है जैसे इसके पत्तों का चूर्ण, पत्तों का जूस या काढ़े का प्रयोग।

गर्भावस्था और स्तनपान

अडूसा का चूहों पर अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में पत्तों के रस का प्रयोग किया गया जिसमे यह निष्कर्ष निकला की इसके प्रयोग ने गर्भपात नहीं होता। हालाँकि गर्भवस्था और स्तनपान में इसके दुष्प्रभावों का कोई अध्ययन उपलब्ध नहीं है।

आयुर्वेद में, गर्भावस्था के दौरान अडूसा का प्रयोग जी मिचलाना, उलटी या अम्लता को दूर करने के लिए अदरक के साथ किया जाता है। इसलिए थोड़े समय या मात्रा में उसका प्रयोग करने से इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता किन्तु लम्बे समय तक इसका प्रयोग करने से बचना चाहिए। 

Adhatoda Vasica – Vasaka

Adhatoda Vasica (also called Vasaka) is an ayurvedic medicinal plant used for a cough, asthma, breathing trouble, nasal congestion, bleeding disorders, allergic conditions, upper respiratory infections, excessive uterine bleeding, heavy menstruation, and epistaxis (nosebleed).

Adhatoda Vasica (Vasaka) has mucolytic, expectorant and bronchodilator action, so it is greatly used in respiratory troubles. It relieves a cough, fights off respiratory infections and helps in the management of asthma.

“BROMHEXINE IS AN EXPECTORANT, MUCOLYTIC AND BRONCHODILATOR MODERN DRUG, WHICH IS A SYNTHETIC FORM OF ALKALOID VASICINE FOUND IN ADHATODA VASICA”

Table of Contents [hide]

  • 1 Phytochemistry (Chemical Composition)

  • 2 Medicinal Properties

  • 3 Therapeutic Indications

  • 4 Adhatoda Vasica (Vasaka) Benefits & Uses

    • 4.1 Cough

    • 4.2 Asthma

    • 4.3 Upper Respiratory Infections

    • 4.4 Common Cold

    • 4.5 Sinusitis & Sinus Infection

    • 4.6 Chronic Bronchitis

    • 4.7 Bronchiectasis

    • 4.8 Sore Throat, Throat Pain, Tonsillitis & Postnasal Drip

    • 4.9 Ulcer

    • 4.10 Dyspepsia, Gastritis or Acidity

    • 4.11 Bleeding disorders

    • 4.12 Gout or Raised Uric Acid Level

    • 4.13 Uremia

    • 4.14 Excessive Uterine Bleeding

  • 5 Dosage & Administration

  • 6 Safety Profile

    • 6.1 Side effects of Vasaka (Adhatoda Vasica)

    • 6.2 Pregnancy & Lactation

Phytochemistry (Chemical Composition)

Adhatoda Vasica (Vasaka) contains following active principles, which might responsible for its therapeutic properties.

  1. Vasicine (quinazoline alkaloid)

  2. Vasicine acetate

  3. Vasicinone

  4. Vasicinolone

  5. 2-acetyle benzyle

Medicinal Properties

Adhatoda Vasica (Vasaka) has following medicinal properties.

  • Antitussive – relieves a cough

  • Expectorant – promotes expectoration

  • Bronchodilator – dilates bronchi

  • Anti-bacterial

  • Anti-microbial

  • Anti-viral

  • Anti-inflammatory – reduces inflammation of airways

  • Antihemorrhagic (styptic) – checks bleeding

  • Antioxidant

  • Antispasmodic – Helps in abdominal spasms and relaxes muscles (its action is confirmed due to the presence of Vasicinone alkaloid in Vasaka)

  • Antifungal – Works against ringworm

  • Mild Sedative – Calms the mind

  • Anti-allergic – Fights off allergies

  • Anthelmintic – Anti-parasite or removes worms

  • Appetite stimulant – Improves appetite

  • Mild Anti-hypertensive – Reduces blood pressure

Therapeutic Indications

Adhatoda Vasica (Vasaka) is helpful in following diseases.

  1. Cough (with yellow thick sputum and fever)

  2. Chronic cough due to Tuberculosis along with anti-tubercular medicines

  3. Asthma (wheezing, breathing trouble and chest congestion)

  4. Upper respiratory infections (with a fever and productive cough)

  5. Common cold (with thick yellow discharge or along with secondary bacterial infection)

  6. Chronic Bronchitis

  7. Sinusitis

  8. Sore throat

  9. Throat pain

  10. Throat Irritation

  11. Tonsillitis (swelling or inflammation of tonsils with redness)

  12. Throat ulcers

  13. Excessive thirst

  14. Nosebleed (epistaxis) – due to excess heat

  15. Angina pectoris

  16. Heart diseases (including high blood pressure)

  17. Mild constipation

  18. Dengue fever

Adhatoda Vasica (Vasaka) Benefits & Uses

Adhatoda Vasica is a drug of choice for respiratory diseases in Ayurveda. It is the main ingredient in every proprietary ayurvedic medicines used for a cough and asthma. It is a simple, easily available and safe herb, which gives relief from bacterial infections and throat problems.

The main action of this herb is observed on the respiratory system and circulatory system. Here are some clinical uses and health benefits of Adhatoda Vasica.

Cough

Adhatoda Vasica has potent antitussive properties. It gives relief from a cough. The effects in suppressing cough in animal studies found to be similar to codeine. 

In ayurvedic Medicine, Adhatoda Vasica is used when patient coughing up yellow thick sputum and has a fever, wheezing or difficulty in coughing up the sputum. Then the following herbal combination is given.

Adhatoda Vasica Powder (Vasaka Churna)2 grams

Sitopaladi churna2 grams

Honey1 teaspoon

The decoction prepared from Adhatoda Vasica leaves can also help in such cases. Its decoction reduces inflammation, cough, and wheezing and it eases in breathing.

Asthma

Adhatoda Vasica has anti-inflammatory characteristics. It helps in asthma and reduces inflammation of airways and lungs. 

Furthermore, VASICINE compound found in n Adhatoda Vasica is bronchodilator, which eases the breathing process and reduces wheezing due to asthma.

In Ayurveda, the following herbal combination is helpful for asthma.

Fresh Adhatoda Vasica leaf juice5 ml

Fresh Ginger juice2.5 ml

Honey1 teaspoon

If you cannot prepare fresh formulation, then the following herbal formula of Vasaka can also help to reduce asthmatic attacks and ease breathing.

Adhatoda Vasica Powder (Vasaka Churna)2 grams

Pushkarmool (Inula racemosa)250 mg

Trikatu Churna250 mg

Sitopaladi churna2 grams

Honey1 teaspoon

Upper Respiratory Infections

Adhatoda Vasica has antibacterial and antimicrobial properties. Therefore, it is helpful in a variety of bacterial infections of the respiratory system. (45)

Vasaka is commonly used in Ayurveda for fever, upper respiratory tract infections, and cough. Many ayurvedic formulations used for this purpose contain it as a main ingredient. The most commonly used formulation is VASABLEHA (Vasavaleha). The following A. Vasica formulation is also helpful in the management of upper respiratory infections.

Adhatoda Vasica Powder (Vasaka Churna)1 grams

Sitopaladi churna2 grams

Mahasudarshan Churna2 grams

Tulsi Churna (Holy Basil Powder)1 gram

Honey1 teaspoon

This works when the patient has yellow thick sputum, cough, fever, nasal congestion, wheezing etc.

Common Cold

Adhatoda Vasica has anti-viral medicinal property, which makes it effective in viral diseases. Ayurvedic doctors use it in the common cold when nasal discharge is yellow and thick. Generally, Vasavaleha is recommended in such condition, but the following Vasaka combination is also effective in such cases.

Adhatoda Vasica Powder (Vasaka Churna)1 gram

Sitopaladi churna1 gram

Punarnava Churna1 gram

Trikatu Churna125 mg

Honey1 teaspoon

Sinusitis & Sinus Infection

As explained above, Adhatoda Vasica has antimicrobial and anti-inflammatory properties. 

It reduces inflammation of sinuses and fights off infections. It reduces the blockage of sinuses and removes pus or fluid from them.

Chronic Bronchitis

Adhatoda Vasica has antiseptic effects for bronchial tubes. It reduces the inflammation of bronchial tubes and reduces thickened mucus due to its expectorant effects. Vasaka clears the bronchial tubes and reduces a cough, production of sputum, fatigue, breathlessness and chest discomfort associated with bronchitis.

Bronchiectasis

Bronchiectasis is caused by chronic inflammation, which results in the failure to clear sputum. In such condition, abnormal dilation of airways causes excessive mucus production.

In Ayurvedic medicines, Vasaka is used for managing such condition. However, it has mild bronchodilator effects, but it has potent mucolytic and expectorant action. Therefore, the effect of its bronchodilatory properties becomes insignificant to cause further bronchodilatation. It helps to expel and coughing up the sputum and to clear the airways. Furthermore, it reduces chronic inflammation of airways, which helps to restore natural functions of the airways.

If the sputum is too thick and one feels difficult to expel it, then the mixture of 20 ml juice of Vasaka Leaves with 250 mg Black Salt (Kala Namak) is useful.

To reduce bronchodilatation, 3 grams Vasaka leaves powder is used with 50 mg Datura leaves powder and 1 teaspoon of honey.

Sore Throat, Throat Pain, Tonsillitis & Postnasal Drip

With medicinal properties like anti-inflammatory and antibacterial, antiviral, Adhatoda Vasica is helpful in a sore throat, throat pain and tonsillitis. It also reduces redness, pain, and inflammation of soft palate.

Patients with postnasal drip or discharge can get benefits using Vasaka leaves along with Sitopaladi churna and punarnava churna.

Ulcer

According to scientific study and analysis, Adhatoda Vasica has anti-ulcer property. Its leaves can reduce ulceration due to NSAIDs including aspirin. (8)

According to Ayurveda, it is beneficial in bleeding disorders and ulceration. It is also described in various ayurvedic ancient books including CHARAKA SAMHITA.

It can help in peptic and duodenal ulcer. The following vasaka combination is used for this purpose.

Adhatoda Vasica Powder (Vasaka Churna)1 gram

Glycyrrhiza glabra (Mulethi)1 gram

Asparagus – Shatavari Churna500 mg

Banslochan500 mg

Misri (sugar)1 gram

Dyspepsia, Gastritis or Acidity

Vasaka has good results in dyspepsia, gastritis or acidity. It reduces acid formation in the stomach. In the study, scientists have observed that it reduces free and total HCL in patients with non-ulcer dyspepsia, hyperacidity, and gastritis. (9)

Many herbalists use following Vasaka formula for hyper acidity and ulcer.

Adhatoda Vasica Powder (Vasaka Churna)1 gram

Glycyrrhiza glabra (Mulethi)1 gram

Amla Churna500 mg

Asparagus – Shatavari Churna500 mg

Pitpapra (fumaria indica)500 mg

Banslochan500 mg

Misri (sugar)1 gram

Bleeding disorders

(Including nosebleed and internal bleeding)

The following formulation is used for bleeding disorders, cough, and asthma. It is described in CHARAKA SAMHITA (CHIKITSA SASTHANA, CHAPTER 4, RAKTPITTA, and VERSE 65)

Adhatoda leaves juice5 grams

Vitis Vinifera5 grams

Haritaki (Terminalia chebula) Fruit pulp5 grams

Take above herbs in described amount and make a decoction in 400 ml water, when 100 ml water remains during heating and let it cool down. Now add 1 teaspoon honey in decoction and drink twice a day.

Gout or Raised Uric Acid Level

Adhatoda Vasica also reduces joint inflammation. With other herbs, it helps in reducing raised uric acid and pain and tenderness associated with gout. It is used with Giloy (Tinospora cordifolia) and amaltas (Cassia fistula) in gouty arthritis.

Uremia

Uremia is the condition with elevated urea level and nitrogenous wastes in the blood. It commonly occurs in acute renal injury and chronic renal failure. In such case, kidneys become unable to eliminate these toxic wastes.

Adhatoda Vasica root decoction is beneficial in decreasing the urea level and other nitrogenous wastes in the blood. How does it work is not yet known, but it increases the excretion of urea and other wastes through the urine. 50 ml Adhatoda Vasica root decoction is effective in initial or starting phase of chronic renal failure when used along with Chandraprabha Vati on the empty stomach. The results start appearing within the first week of the treatment.

Excessive Uterine Bleeding

10 ml Vasaka juice or 50 ml Vasaka decoction along with 10 grams Misri powder is beneficial for treating excessive uterine bleeding. The treatment duration with this remedy should be continued at least for 4 to 6 weeks. Chandraprabha Vati should also be used with this remedy for restoring natural uterine functions.

Dosage & Administration

The different parts of Vasaka herb have following recommended dosage.

Vasaka leaves1 gram to 3 grams

Leaf DecoctionPrepared with 5 grams leaf powder

Vasaka roots250 mg to 500 mg

Vasaka Leaf juice5 ml to 10 ml

Vasaka flower powder250 mg to 1000 mg

Safety Profile

All parts of Adhatoda Vasica or Vasaka are likely safe to consume as per dosage described above.

Side effects of Vasaka (Adhatoda Vasica)

There are no side effects observed with Adhatoda Vasica or Vasaka when it is used in a natural form including leaf powder, leaf juice, decoction etc.

Pregnancy & Lactation

Adhatoda Vasica has studied for its abortive effects in rats. In this study, leaf extract was used, which has Standard Vasicine alkaloid about 0.85%. Adhatoda vasica did not cause abortion in any group treat with it. (10)

However, there is no study available for the crude form of Vasaka safety in breastfeeding and pregnancy.

In Ayurveda, Adhatoda Vasica is used during pregnancy to reduce symptoms of nausea, vomiting, acidity along with ginger. Therefore, it might be safe during pregnancy and breastfeeding for short-term use. The long-term use should be discouraged.

Designed & Developed By

Yogi Art (Designer In All Field)

Jagdish M Raval 

​Government Ayurved Hospital Himatnagar 

 Mob.9427695024 / 7990534470